सूर्य से सीखें स्थिरता व ऊर्जावान रहने की कला
ऋग्वेद में सूर्य को ब्रह्मांड का नेत्र कहा गया हैं, जो प्राणदाता है और अंधकार का संहारक है
नेतृत्व
भारतीय परंपरा में ‘सूर्यदेव‘ या ‘सविता‘ के नाम से उल्लेखित सूर्य को जीवन, प्रकाश और असीम ऊर्जा का स्रोत माना गया है। सूर्य प्रतिदिन बिना किसी विघ्न के उदित होता है और समस्त संसार को निष्पक्ष रूप से आलोकित करता है। ऋग्वेद में सूर्य को ब्रह्मांड का नेत्र कहा गया है, जो प्राणदाता है और अंधकार का संहारक है। सूर्य, नेतृत्व में स्थिरता, दृष्टि और तेजस्विता का पाठ सिखाता है।
ज्ञान द्वारा प्रकाश देना:
सूर्य का प्रकाश अंधकार को मिटाता है और मार्ग को स्पष्ट करता है। ठीक उसी प्रकार, एक लीडर का कर्तव्य है कि वह अपने समूह को दृष्टि और दिशा प्रदान करे।
विश्वसनीयता और निरंतरताः
सूर्य रोजाना उदित होता है। उसमें प्रतिदिन वही नियमितता होती है और वही अनुशासन। यह स्थिरता एक विश्वसनीय शक्ति है। एक सच्चा लीडर भी वचनों पर अडिग रहता है, व्यवहार में निरंतरता रखता है व सिद्धांतों में अचल होता है।
ऊर्जा और उत्साह का संचारः
सूर्य जीवनदायी ऊर्जा का स्रोत है। वह अन्न उपजाता है, जीवन को पोषण देता है और चेतना में ऊष्मा भरता है। उसी प्रकार, एक लीडर भी ऊर्जा का स्रोत होता है। वह अधीनस्थों को और अन्य सभी को प्रेरित करता है, उत्साह देता है। संकल्प की भावना से पूर्ण कर देता है। प्रत्येक व्यक्ति के भीतर यह सामर्थ्य निहित है कि वह सूर्य के समान प्रकाशवान बन सके। इस प्रकार सफल नेतृत्व वही है जो आंतरिक ज्योति को जाग्रत करे।
निष्पक्षता और समदृष्टिः
सूर्य सब पर समान रूप से प्रकाश डालता है। वह न किसी को अधिक देता है, न किसी को कम। सच्चा नेतृत्व भी ऐसा ही निष्पक्ष होता है। हर सदस्य को समान आदर, अवसर और न्याय देता है, चाहे उसकी भूमिका कुछ भी हो। यही समदृष्टि संगठन में विश्वास, एकता और निष्ठा को जन्म देती है। एक लीडर अपने भीतर से पक्षपात को मिटाकर, विविधता को अपनाए और सभी के साथ समान व्यवहार करे।
सूर्य हमें सिखाता है कि नेतृत्व दिखावे में नहीं, प्रकाश देने की क्षमता में है। यह नेतृत्व का केंद्रीय बिंदु बनने का प्रयत्न नहीं, अपितु ऊर्जा और चेतना का केंद्र बनने की आकांक्षा है। सूर्य जैसे लीडर ही हर दिन नवीन उद्देश्य से उदित होते हैं। वे प्रकाश फैलाते हैं, दिशा देते हैं, अपने आलोक से दूसरों को भी ज्योतिर्मय बनाते हैं।
आभार- प्रो.हिमांशु राय
