भारतीय मजदूर संघ के स्वर्णिम 70 वर्ष
भारत दुनिया का प्राचीनतम राष्ट्र है। हमारे ऋषि मुनियों ने मनुष्य के लिए भौतिक एवं चारित्रिक सुचिता के साथ-साथ आध्यात्मिक शिक्षा और वसुधैव कुटुंबकम की अवधारणा पूरे विश्व को दी। शून्य से सृष्टि तक के निर्माण में श्रम की महत्ता रही है। सभी काल खण्डों में मालिक एवं मजदूर का आपस में संबंध रहा है और श्रमिकों को कार्य के बदले पारिश्रमिक दिया जाता था। मनुस्मृति, शुक्र नीति, भीष्म नीति, नारद नीति एवं विश्वकर्मा पुराण में श्रम नीति का विस्तार से वर्णन है। भारत में उद्योगों के विस्तार के साथ ही 20वीं सदी के प्रारंभ में मजदूर संगठनों ने अपना कार्य प्रारंभ कर दिया था। परंतु उनके कार्यकलाप रूस और चीन के वामपंथी विचारधारा के आधार पर थे, जो भारतीय संस्ति और जीवन दर्शन के अनुकूल आज भी नहीं है। इसलिए समाज को युवावस्था से ही संपूर्ण जीवन समर्पित करने वाले ऋषितुल्य संघ के प्रचारक श्रद्धेय दत्तोपंत ठेंगड़ी जी को भारत की मिट्टी के अनुकूल एक नया मजदूर संगठन बनाने के लिए तत्पर किया गया। उन्होंने भारतीय जीवन दर्शन एवं प्रखर राष्ट्रवाद से ओत-प्रोत राष्ट्रहित और उद्योगहित के साथ-साथ श्रमिकों के सर्वांगीण उत्थान के लिए स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जी तथा चंद्रशेखर आजाद जी के जन्मदिन 23 जुलाई 1955 को गैर राजनीतिक एक विशुद्ध ट्रेड यूनियन भारतीय मजदूर संघ (भामस) (BMS) का गठन किया।
वामपंथी विचारधारा के श्रम संगठनों और राजनैतिक विचारधारा से जुड़े अन्य संगठनों के नारे ‘चाहे जो मजबूरी हो, मांग हमारी पूरी हो’ से अलग हटकर’ भारत माता की जय’ के साथ ‘देश के हित में करेंगे काम, काम के लेंगे पूरे दाम’ जैसे राष्ट्रीय प्रतिबद्धता से युक्त जय घोष करने वाला भारतीय मजदूर संघ देश के सभी उद्योगों में व्यापक हो चुका है। 7% संगठित क्षेत्र के उद्योगों में रक्षा, रेलवे, पोस्टल, बीएसएनल, बैंक, बीमा, सार्वजनिक क्षेत्र, निर्माण श्रमिक, कोस्ट गार्ड, विद्युत, रोडवेज, उड्डयन आदि और 93% असंगठित क्षेत्र के उद्योगों में षि, ग्रामीण मजदूर, रेहड़ी पटरी, आशा, आंगनवाड़ी, स्वास्थ्य, एनएचएम, एनआरएलएम, सफाई कर्मचारी, मनरेगा, सखी समूह, दुकान वाणिज्य, बैंक मित्र, शिक्षणेत्तर कर्मचारी, सहकारिता, टेंपो टैक्सी, ट्रांसपोर्ट, मत्स्य, होटल आदि क्षेत्रों में करोड़ों कार्यकर्ताओं के उत्साह से पिछले 70 वर्षों से अनवरत कार्य कर रहा है।
राष्ट्रीय व सामाजिक उपलब्धियां :
वर्ष 1955 में स्थापित भामस का प्रथम अधिवेशन 1967 में दिल्ली में संपन्न हुआ। तब से अनवरत, मजदूरों के बीच कार्य करता हुआ, धीरे-धीरे लोकप्रियता के शिखर पर चढ़ता गया और वर्ष 1989 में सदस्यता सत्यापन के आधार पर सरकार द्वारा देश का सर्वाधिक सदस्यों वाला प्रथम क्रमांक का श्रम संगठन घोषित हुआ।
संगठित और अविघटित भामस पिछले 35 वर्षों से देश का प्रथम क्रमांक का श्रम संगठन लगातार बना हुआ है और अंतरराष्ट्रीय लेबर ऑर्गेनाइजेशन के सभी सम्मेलनों में भारतीय श्रम संघों का प्रतिनिधित्व कर रहा है। इससे भारतीय संस्ति और रीति नीति को पूरे विश्व के मजदूरों तक पहुंचाना आसान हो गया है।
वर्ष 1963 में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स के विरुद्ध जबरदस्त आंदोलन चलाकर मजदूरों को महंगाई भत्ता एवं बोनस का लाभ दिलाया।
दिसंबर 1969 में दिल्ली में विशाल प्रदर्शन करके भामस ने श्रमिकों से जुड़ी समस्याओं, बोनस, प्रमोशन पॉलिसी तथा असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए वेतन एवं सामाजिक सुरक्षा के मुद्दे का समाधान निकालने के लिए केंद्र सरकार को मजबूर किया।
सन 1971 में पाकिस्तान से युद्ध शुरू होने पर भामस द्वारा अपनी पूर्व घोषित हड़ताल को वापस लेने पर उसके कार्यकर्ताओं ने 16-16 घंटे काम करके सेना की सारी जरूरतें पूरी किया और देश को युद्ध में विजय दिलाने में अपनी राष्ट्रभक्ति को चरितार्थ किया।
1975 में आपातकाल की घोषणा के बाद किसी अन्य मजदूर संगठन ने साहस नहीं दिखाया, परंतु भामस ने जबरदस्त आंदोलन चलाया, जिसके फलस्वरूप उसके सैकड़ों कार्यकर्ताओं को नौकरी से हाथ धोना पड़ा और हजारों की संख्या में कार्यकर्ता जेल में भी रहे।
अप्रैल 2001 में गेट समझौते के विरोध में श्रद्धेय ठेंगड़ी जी के नेतृत्व में विशाल रैली का आयोजन दिल्ली में हुआ और इसके पश्चात सरकार को हमारे नारे तोड़ो, मोड़ो और छोड़ो के अनुरूप नीतियां बनानी पड़ी।
नवंबर 2011 में जंतर मंतर दिल्ली में तथा नवंबर 2017 में रामलीला मैदान से संसद भवन तक लाखों मजदूरों, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं सम्मिलित हुई, ने पैदल मार्च किया। इस आंदोलन के बाद आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों का मानदेय 1500 रुपए बढ़ाने के साथ-साथ असंगठित क्षेत्र के मजदूरों की विभिन्न मांगें भारत सरकार द्वाररा मान ली गई।
बैंकिंग उद्योग के इतिहास में पहली बार बिना किसी हड़ताल के द्विपक्षीय समझौते को लागू करवाया।
संघर्ष और प्रतिफल
उत्तर प्रदेश में लगभग 14 करोड़ श्रमिक हैं, जिनके मूलभूत सुविधाओं- रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए भारतीय मजदूर संघ उत्तर प्रदेश हमेशा तत्पर और सचेत रहता है तथा समय-समय पर आंदोलन भी करता रहता है। नवंबर 2023 को लखनऊ में विशाल रैली इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। भामस के आंदोलन और मांगों के अनुरूप ही केंद्र व प्रदेश सरकारें श्रमिकों के लिए अपनी योजनाएं धरातल पर उतारती हैं।
अकुशल, अर्ध कुशल व कुशल श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी में समय-समय पर वृद्धि होना।
भवन सन्निर्माण व असंगठित क्षेत्र बोर्ड द्वारा श्रमिकों के परिवार को मातृत्व हितलाभ, बच्चों की शिक्षा हेतु छात्रवृत्ति, अस्वस्थता की स्थिति में मुफ्त इलाज तथा श्रमिक की मृत्यु होने पर एकमुश्त सहायता राशि प्रदान करना आदि।
ESIC में पंजीकृत श्रमिकों को लाखों रुपए तक चिकित्सा लाभ के साथ बेरोजगार होने पर दो वर्ष तक बेरोजगारी भत्ता मिलना।
सफाई कर्मचारी का कार्य करते समय मृत्यु की दशा में केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा परिवार को आर्थिक सहायता ।
राज्य सरकार द्वारा संविदा कर्मियों के लिए बोर्ड गठित कराकर न्यूनतम मजदूरी तय कराना।
विश्वकर्मा योजना में लोहार, कुंभकार, बढ़ई, मोची आदि छोटे कारीगरों को 15000 रुपए मूल्य के औजार और एक से तीन लाख तक ऋण उपलब्ध कराना।
NHM कर्मियों के बीमा और स्थानान्तरण नीति तय कराना।
संविदा कर्मियों के लिए स्थाई नीति निर्धारित करवाना।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन से न्यूनतम पेंशन बढ़वाना और डीए से लिंक कराना।
एनआरएलएम कर्मियों के बीमा और स्थानांतरण नीति तय करवाना।
सीमेंट, जूट, टेक्सटाइल, शुगर, इंजीनियरिंग, डिस्टलरी, पेपर आदि उद्योगों के कर्मचारियों का वेतन पुनरीक्षण कराना।
15 वर्ष से अधिक समय से कार्यरत रोडवेज के संविदा आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को नियमित कराना।
रोडवेज व विद्युत के संविदा कर्मियों, दैनिक वेतन भोगियों का ESIC लागू कराना एवं नियमावली बनवाना।
सामाजिक संकल्पना
भारतीय मजदूर संघ केवल वेतन और पेंशन आदि सुविधाओं के लिए ही संघर्षरत नहीं रहता है बल्कि वह मजदूरों के समग्र कल्याण हेतु प्रयत्नशील रहा है। इस दृष्टिकोण से भामस श्रमिक समाज के समग्र उत्थान हेतु पंच परिवर्तन के सिद्धांत पर उनको जागृत और सचेत रहने हेतु प्रेरित करता रहता है।
पंच परिवर्तन का पहला विषय कुटुंब प्रबोधन समाज और परिवार के विघटन को रोकने तथा पारिवारिक एकता को संस्कारित और मजबूत करने का उद्देश्य रखता है।
पर्यावरण सर्व समाज के लिए चिंता का विषय होना चाहिए। इसलिए भामस श्रमिकों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करते रहना अपना कर्तव्य समझता है।
स्वदेशी का भाव श्रमिकों के जीवन से गहराई से जुड़ा है क्योंकि देश में जितने अधिक से अधिक उद्योग होंगे, उतने ही ज्यादा से ज्यादा श्रमिकों को रोजगार मिलेगा। पर, उद्योग तभी चलेंगे और पनपेंगे जब उसके उत्पाद को हम देश के अंदर उपभोग करने की शक्ति रखेंगे। इसलिए हम सब के मन में हर क्षण स्वदेशी की भावना बलवती रहनी चाहिए।
भारत विभिन्न धर्म-जाति भाषा-भाषी लोगों का देश है। इसलिए हम सब भारतवासी एक हैं और हमारे अंदर समरसता का भाव बना रहेगा तो हमारा देश और हमारा समाज सुखी व समृद्ध बना रहेगा।
हम श्रमिक हो या ना हो, परंतु हम भारत के नागरिक अवश्य हैं। एक तरफ जहां श्रमिकों और नागरिकों के कुछ अधिकार होते हैं, जिसके लिए वह संघर्ष करते रहते हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके कुछ कर्तव्य भी होते हैं, जिसे नागरिक कर्तव्य कहा जाता है। देश हमें बहुत कुछ देता है, इसलिए हम अपने कर्तव्यों को विधिवत पूरा करते रहें तो हम देश का कुछ ऋण उतारने में सक्षम हो पाएंगे।
