जड़ें सिखातीं समर्थन व शक्ति का महत्व
नेतृत्व में दृढ़ता जरूरी है यानी विफलताओं से उबरने की क्षमता
नेतृत्व
प्रत्येक विशाल वृक्ष के नीचे एक जटिल जड़ प्रणाली होती है। यह लुप्त-सी होती है, मौन भी होती है, किंतु अत्यंत प्रभावशाली होती है। भारतीय शास्त्रों में जड़ों को मूल्य, सद्गुण और आध्यात्मिक आधार के रूपक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। लीडर्स के लिए जड़ें आधारभूत शक्ति, निस्वार्थता और अदृश्य संबंधों के पोषण की शिक्षा देती हैं।
मजबूत आधार से शक्तिः
वृक्ष की बाहरी भव्यता उसकी जड़ों की अदृश्य शक्ति से बनी रहती है। नेतृत्व में भी मजबूत आधार स्थापित करना आवश्यक है, जो सिद्धांतों और मूल्यों में दृढ़ हो और बाहरी दबावों को सह सके। जैसे जड़ें तूफानों में वृक्ष को स्थिर रखती हैं, वैसे ही मूल्य संकट के समय एक लीडर को स्थिरता देते हैं।
मौन रूप से भी दें सहाराः
जड़ें कठोर परिश्रम करती हैं, पर अदृश्य रहती हैं। उसी तरह प्रभावशाली लीडर पर्दे के पीछे कार्य करते हैं। वे बिना प्रशंसा की इच्छा के सभी को समर्थन देते हैं। टीम को सशक्त बनाते हैं। निरंतरता के साथ विकास के लिए प्रेरित करते हैं।
जुड़ाव और पोषणः
जड़ें कभी अकेली नहीं होतीं। वे अन्य जड़ों के साथ जुड़ती हैं, पारस्परिक समर्थन का तंत्र बनाती हैं। लीडर्स को समझना चाहिए कि शक्ति उनके संबंधों में निहित है। जिन लोगों को वे उन्नत करते हैं और जिन विश्वासों का निर्माण करते हैं-वे ही उनकी शक्ति हैं।
दृढ़ता और पुनरुत्थानः
जड़ें कठिन परिस्थितियों में भी जीवित रहती हैं और सूखी मिट्टी से भी पोषण ग्रहण करती हैं। इसी प्रकार, नेतृत्व में दृढ़ता जरूरी है यानी विफलताओं से उबरने की क्षमता। एक लीडर को विपत्तियों से शक्ति लेनी चाहिए।
जड़ें वृक्ष को बिना प्रकाश खोजे जीवन देती हैं, वैसे ही लीडर बिना प्रसिद्धि की लालसा के समर्थन, संबंधों का पोषण व मूल्य आधारित नेतृत्व प्रदान करते हैं।
विशेष आभार: प्रो. हिमांशु राय
