वायु से सीखें, शक्ति व अनुकूलनशीलता
नेतृत्व
वायु यानी हवा एक ऐसी प्राकृतिक शक्ति है, जो नेतृत्व के गूढ़ पाठ सिखाती है
अदृश्य फिर भी सर्वव्यापी, कोमल और प्रचंड, यह वायु है। वायु यानी हवा एक ऐसी प्राकृतिक शक्ति है, जो नेतृत्व के गूढ़ पाठ सिखाती है। भारतीय़ शास्त्रों में वायु को प्राणवाहक और अदृश्य शक्ति का प्रतीक माना गया है। उपनिषदों में चंचल मन की तुलना वायु से की गई है। इसे अस्थिर, परंतु जीवनदायिनी माना गया है।
अनुकूलनशीलता और प्रवाहशीलता
वायु बिना किसी विरोध के दिशा बदलती है। वह अवरोधों के समक्ष रुकती नहीं, वरन् उन्हें लांघकर घुमाव लेती हुई अपने मार्ग पर अग्रसर रहती है। नेतृत्व में भी यही गुण आवश्यक है। एक लीडर को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वह रणनीतियों को परिस्थिति के अनुसार ढालने की क्षमता रखे, ताकि उसका हर लक्ष्य स्थिर रहे।
उपस्थिति, दृश्यता के :
वायु दिखाई नहीं देती, फिर भी उसकी उपस्थिति सर्वत्र अनुभव की जाती है। उसकी शक्ति उसके दृष्टिगोचर होने में नहीं, बल्कि उसके प्रभाव में निहित है। एक सच्चा लीडर भी ऐसा ही होता है। वह मात्र बिना आदेश नहीं देता, बल्कि कार्यों और निर्णयों के माध्यम से प्रभाव डालता है। एक लीडर का कार्य मान्यता की अपेक्षा नहीं, अपितु कर्तव्य का निर्वहन है।
सूक्ष्म, फिर भी शक्तिशालीः
कोमल समीर चित्त को शांत करती है और तीव्र तूफान वृक्षों को उखाड़ देता है। वायु कोमलता और तीव्रता दोनों का रूप है। यह सिखाती है कि परिवर्तन के लिए उच्च स्वर आवश्यक नहीं, कभी-कभी मौन, सटीक और सुसंगत दृष्टिकोण भी पर्याप्त होता है। बल प्रयोग में नहीं, बल्कि उसे उचित दिशा में, उद्देश्य के साथ प्रयुक्त करने की क्षमता को ही सफल बल माना जाता है यही नेतृत्व का आधार है।
मार्ग की मुक्तिः
वायु मार्ग को अवरोधों से मुक्त करती है, वातावरण को शुद्ध करती है और नव आरंभ के लिए स्थान बनाती है। नेतृत्व में इसका अर्थ है भ्रांति हटाना, दृष्टिकोण स्पष्ट करना और नए विचारों के लिए स्थान प्रदान करना। कभी-कभी यह रूढ़ मान्यताओं और अव्यावहारिक प्रणालियों को हटाने का भी कार्य करता है। एक लीडर भी अपने समूह का मार्गदर्शक होता है। वह प्रत्येक कदम तो नहीं बताता, परंतु दिशा अवश्य देता है।
वायु की भांति सशक्त नेतृत्व प्रवाहशील परन्तु अडिग होता है। यह अदृश्य, प्रभावशाली और कोमल होता है किन्तु सशक्त भी होता है।
आभार प्रो. हिमांशु राय
